गुड्डा

“माँ, मुन्ना कब बोलेगा और मुझे गले लगाएगा?” सोनू ने कपड़े के गुड्डे को गले लगते हुए माँ से पूछा।

कमला रोटी बनाते-बनाते एक पल के लिए रुक गई और खुद को संभालते हुए बोली “शाम को पिताजी से पूछना”

खाट पर बैठी सोनू की दादी ने मुँह बनाते हुए कमला को घूरा।

“माँ, तुम कहती थी की जल्दी ही भाई लाने वाली हो मेरे लिए जो मेरे साथ खेलेगा। तुम उस दिन अस्पताल गयी पिताजी के साथ, गुड्डा तो ले आईं पर ये सोता ही रहता है?”

कमला चूल्हा बंद कर रोते हुए घर से बाहर निकल गई….

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बड़ी बहन

दीपू शांती से एक साल छोटा था, लेकिन जिंदगी के थपेड़ों ने उसे उम्र से पहले बड़ा कर दिया। बाहर की दुनिया के लिए वो शांती का बड़ा भाई था, उसके हर सुख-दुख का ख़याल रखने वाला।

माँ-बाप की सड़क पर काम करते हुए मौत हो गयी थी। शांती पर काफी लोगों की नज़र थी, मगर दीपू दिवार बनकर खड़ा था उसके और दुनिया के बीच में।

आज भी जब दोनों खाना खा रहे थे तो मंगल आया था, लेकिन दीपू ने हाथ में खुखरी उठाकर शोर मचा दिया। और उसको भागता देख शांतीे मुस्करा उठी।

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शाँति..

मृदुल आज कुछ समय अकेले बिताना चाहता था, सुबह घर से आए ख़त को पढ़कर वो दुखी था।

पिताजी गुज़र गए थे, वो मृदुल की खराब आदतों से काफी परेशान रहते थे। आए दिन मृदुल के पुलिस थानों के चक्कर लगते, हद्द तो तब हो गयी जब मृदुल ने अपनी ही बहन की इज्जत पर हाथ डाल दिया और उसने आत्महत्या कर ली। उस दिन से मृदुल मृदुल ना रहा, दुनिया भर शांति की तलाश में भटका।

वो असीम शांति उसे यहां पहाड़ों में छोटे से गाँव में मिली थी, और गाँव वालों ने उसे भगवान् का दर्जा दे दिया।

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