गुजर रही है…

सभी दोस्तों के लिए जो मेरे दिल के करीब हैं…

Dil Se...

गुज़र रही है जिंदगी,
दूर और कभी करीब से।
कमा लेते हैं खासा,
फिर भी हैं गरीब से।

भरी जेठ की दुपहरी,
ठिठुरती पूस की ठण्ड।
महफ़िलें थी जमा करती,
बैठ अपने यारों के संग।

हर रोज एक नया खेल,
कितना सब थे झगड़ते।
सीटियों के इशारों से,
दोस्त हमें बुलाया करते।

कल की हमे फ़िक्र कहाँ,
आज में जीना था आता।
बहुत से ऐसे भी थे जिन्हें,
रोज चेहरा नया भाता।

फिर एक रोज ये सुना,
की अब हम बडे हो गए,
जिंदगी की कश-म-कश में,
खुद से ही कहीं खो गए।

वो दिन पल लौटकर,
अब कभी ना आएंगे।
ऐ जिंदगी हार न मानेंगे,
लड़ते यूँही हम जाएंगे।

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गुजर रही है…

गुज़र रही है जिंदगी,
दूर और कभी करीब से।
कमा लेते हैं खासा,
फिर भी हैं गरीब से।

भरी जेठ की दुपहरी,
ठिठुरती पूस की ठण्ड।
महफ़िलें थी जमा करती,
बैठ अपने यारों के संग।

हर रोज एक नया खेल,
कितना सब थे झगड़ते।
सीटियों के इशारों से,
दोस्त हमें बुलाया करते।

कल की हमे फ़िक्र कहाँ,
आज में जीना था आता।
बहुत से ऐसे भी थे जिन्हें,
रोज चेहरा नया भाता।

फिर एक रोज ये सुना,
की अब हम बडे हो गए,
जिंदगी की कश-म-कश में,
खुद से ही कहीं खो गए।

वो दिन पल लौटकर,
अब कभी ना आएंगे।
ऐ जिंदगी हार न मानेंगे,
लड़ते यूँही हम जाएंगे।

Age of innocence..

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This is an age when fun means doing whatever you wish to do without caring what others think of you.

(clicked these photographs while driving to my village in Uttarakhand)

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

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Exploring madness***

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aaiye, kuchh likhte hain..

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

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food, travel and musings of a TV presenter.

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

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