तन्हाई…

भीड़ में हैं अजीब तन्हाई है,
कैसी ये दुनिया हम ने बसाई है।

#दिलसे

कब तक…

कब तक
सड़कों पर ख़त्म होना
धुँए में फेफड़ों को पिरोना
इस भाग-दौड़ में रोज ही
भीड़ में खुद को खो देना
कब तक

सुनता हूँ..

सुनता हूँ, पर सुनता नहीं;
शोरगुल है चारों ओर,
क्यूं बस खुद को ही सुनता हूँ मैं।

अकेला नहीं, कई और मुझसे हैं यहाँ;
इतनी भीड़ चारों ओर,
लेकिन बस खुद को ढूंढता हूँ मैं।

क्या खोने को है, क्या पा सकता हूँ;
इतना कुछ चारों ओर,
फिर भी बस खुद की ही तलाश मे हूँ मैं।

(Adapted from Ashish Garg’s post – Hope)

Alone..

Alone in the crowd,
none to hear my shouts.
Am I a living dead?
need to clear my doubts!

(Inspiration – Photograph posted by a fellow blogger at http://strassenfotografien.wordpress.com/2014/03/08/allein-in-der-menge-%e2%80%a2-alone-in-a-crowd/)

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

Yes I am "Deepti"

I am proud to be **

Aaj Sirhaane

aaiye, kuchh likhte hain..

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

angelalimaq

food, travel and musings of a TV presenter.

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

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