कहाँ ले आए हैं – ग़ज़ल

#दिलसे #KoshishGhazal

ख़्वाब…

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#दिलसे #DilSe

ज़रूरतें…

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#दिलसे #DilSe

ख़्वाब…

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#दिलसे #DilSe

ज़र्द ख़्वाब…

#दिलसे #DilSe

रात…

#दिलसे

ख़्वाबों की बस्तियाँ….

#दिलसे

ख़्वाब…

#दिलसे

ज़र्द ख़्वाब…

कुछ नए ज़र्द से ख़्वाब लिखे हैं इन दिनों
और तुम्हारे सिरहाने तले सब रख छोड़े हैं
पुरानी यादों की बारिश से भीगी हुई वो रातें
और आँखों से किये वादे जो तुमने तोड़े हैं।

​मुड़कर उन दिनों को जीने की मेरी कोशिश
और तुमने मेरे लिखे खत भी तो अब मोड़े हैं
मुझे उन अनकहे वादों को निभाने की जिद्द
और तुमने कुछ नए चमकते सितारे बटोरे हैं।

#दिलसे

आसमां…

आसमां की चादर पर कई हसीन ख़्वाब टांगे थे,
सुबह कुछ अजनबियों के हाथों में झूलते दिखे।

#दिलसे

ख़्वाहिश….

गीतों में ढल के
और हल्के हल्के
ख़्वाबों में आना
कभी चलते चलते।

तुम्हे है बताना
मोहब्बत मेरी वो
वहीँ पर खड़ी है
ज़िद्द पर अड़ी है।

यूँ रूठी रहोगी
और कब तलक तुम
तारे था लाया
फ़लक से मैं चुन के।

तुम्हे है भूलाना
है खुद को मिटाना
तेरी ये ख़्वाहिश
अब मेरी जिंदगी है।

#दिलसे

इश्क़ तेरा…

तुम्हारी ज़ुल्फ़ और काँधे का तिल,
हाथ से फिसलता रहा मेरा ये दिल।

ख़ुश्बू तेरे जिस्म की जानता हूँ मैं,
खुद से दूर पर इसे पहचानता हूँ मैं।

यूँ ही सोता रहूँ मैं आग़ोश में तेरे,
ख़्वाबों में बस तू ही दिन-रात मेरे।

मुस्कुराहटें तेरी मेरी रूह का सुक़ून,
तेरे इश्क़ का अंदर उबलता रहा जूनून।

#दिलसे

नया गीत…

आज की रात फिर से कहीं,
नींद चहलकदमी पर है।
कहो तो एक नया गीत,
तुम्हारे नाम लिख दूं।
शब्दों में ढ़ाल कर तुम्हे,
एक और नए रुप में देखूं।
मुस्कुराना तुम खुद को,
नया सा फिर से पा कर।
और मैं रात ख़्वाबों में,
एक बार फिर से तुम्हे देखूं।

चाह..

पूरे ना हों इतने बड़े ख़्वाब नहीं हैं,
आसमान छूने की चाह भी नहीं है।

तुम…

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Photo Credit : @yourworldmylens (Instagram)

तुम तुम्हारी शरारती हँसी,
और हमारी कभी न ख़त्म होने वाली बातें।
अनगिनत चाय की प्यालियां,
और तेरे कान की वो बालियां।
मेरा तुझे देखकर मुस्कुराना,
आँखों से पूछ कर सवाल तेरा शर्माना।
मेरा बात-बात पर नाराज़ होना,
और तेरा हर बार मुझे मना पाना।
तेरा वो कोशिश करना थामने की मेरा हाथ,
और मेरा हंसी में उड़ा देना हर बात।
वो हमारे ख़्वाब और उम्मीद से भरी बात,
सुबह के इंतज़ार में काटी हर रात।
जाने क्यों ख़्वाब वो पानी के बुलबुले से हुए,
एक पल में उभरे दूसरे पल कहीं खो गए।

#दिलसे

जीने की कोशिश..

खुद दिल को अपने बहलाता रहा वो,
ख्वाबों को मेरे जीने की कोशिश में।

Forgive me…

Forgive me for all the pain,
it’s making me as well go insane.
As if life has stopped,
wish our paths won’t have ever crossed.
Let’s not make it more difficult for us,
delaying this is going to make it worse.
I know it is a compromise,
but we will have to pay this price.
Have stopped listening to heart’s cries,
life will go on with your dream in my eyes.

(These lines popped up in my mind while writing one of the scenes of my book . Yes, I am writing a book….)

Lost

Driving down the same roads I feel lost,

destination seems a distant dream.

Music is noise which still plays loud,

that feel of being lonely even in the crowd.

How long can one keep dragging life,

and push dreams far away.

Is it really even worth trying,

for something on the verge of dying!

You will never be mine…..

You will never be mine,
but I still love you.
Please listen to me,
you can’t go like this.
Do you understand,
how much you are being missed.

There was a time,
when you always waited for my calls.
Now even responding to a message,
for you is such a pain.
Please meet me once,
before you are gone.

With your dreams in my eyes,
how am I going to spend this life.
Can not ever stop thinking of you,
always felt we will make it through.
But with you losing all hope and moving on,
it feels life is finished and worth no more!

(Triggered by hearing one side conversation of a sweet little girl talking over phone to someone last evening in Delhi Metro, probably the one she loved to the core of her heart. She was almost of the verge of crying which disturbed me and can not still take off her my mind.)

Flame

aaj ki shairi

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

What do you do Deepti

Exploring madness***

आज सिरहाने

लिखो, शान से!

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

Ruchi Kokcha Writes...

The Shards of my Self

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