रात…

#दिलसे

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ख़्वाबों की बस्तियाँ….

#दिलसे

ख़्वाब…

#दिलसे

ज़र्द ख़्वाब…

कुछ नए ज़र्द से ख़्वाब लिखे हैं इन दिनों
और तुम्हारे सिरहाने तले सब रख छोड़े हैं
पुरानी यादों की बारिश से भीगी हुई वो रातें
और आँखों से किये वादे जो तुमने तोड़े हैं।

​मुड़कर उन दिनों को जीने की मेरी कोशिश
और तुमने मेरे लिखे खत भी तो अब मोड़े हैं
मुझे उन अनकहे वादों को निभाने की जिद्द
और तुमने कुछ नए चमकते सितारे बटोरे हैं।

#दिलसे

आसमां…

आसमां की चादर पर कई हसीन ख़्वाब टांगे थे,
सुबह कुछ अजनबियों के हाथों में झूलते दिखे।

#दिलसे

ख़्वाहिश….

गीतों में ढल के
और हल्के हल्के
ख़्वाबों में आना
कभी चलते चलते।

तुम्हे है बताना
मोहब्बत मेरी वो
वहीँ पर खड़ी है
ज़िद्द पर अड़ी है।

यूँ रूठी रहोगी
और कब तलक तुम
तारे था लाया
फ़लक से मैं चुन के।

तुम्हे है भूलाना
है खुद को मिटाना
तेरी ये ख़्वाहिश
अब मेरी जिंदगी है।

#दिलसे

इश्क़ तेरा…

तुम्हारी ज़ुल्फ़ और काँधे का तिल,
हाथ से फिसलता रहा मेरा ये दिल।

ख़ुश्बू तेरे जिस्म की जानता हूँ मैं,
खुद से दूर पर इसे पहचानता हूँ मैं।

यूँ ही सोता रहूँ मैं आग़ोश में तेरे,
ख़्वाबों में बस तू ही दिन-रात मेरे।

मुस्कुराहटें तेरी मेरी रूह का सुक़ून,
तेरे इश्क़ का अंदर उबलता रहा जूनून।

#दिलसे

Just like that

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