प्रेम का धागा…

प्रेम का वो धागा
जिसे में अब तक
संजोये बैठा था
आज उसे खोलता हूँ।

मेरे हर हठ व् बंधन से
तुम अब मुक्त हो
टूट कर चाहा है तुम्हे
इसलिए इतना टटोलता हूँ।

वहीँ रहा मैं खड़ा
दूर तुम निकल गयीं
अपने हर शब्द को अब
तुम्हे कहने से पहले तोलता हूँ।

खुद को तुम व्यर्थ
यूँ ही खर्च ना करो
रोज ही उसके आगे
बहुत देर हाथ मैं जोड़ता हूँ।

मेरे प्रेम से तुम्हारा
मोह भंग यूँ हो जाएगा
सच है नहीं ये बिल्कुल
दिन-रात बस यही सोचता हूँ।

राह जो चुनी तुम ने
खुशियाँ मिलें वहाँ तुम्हें ढेरों
थामने को हाथ ना हो कोई कभी
यहीं मैं मिलूँगा आज फिर बोलता हूँ।

#दिलसे

Advertisements

Innocent life on the streets..

This slideshow requires JavaScript.

Brother’s out on the street, all they asked for was something to eat and a cup of tea. And this was the least I could do, which made them feel so happy!

22 Things Happy People Do Differently

Must Read!

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

What do you do Deepti

Exploring madness***

आज सिरहाने

लिखो, शान से!

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

angelalimaq

food, travel and musings of a TV presenter

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

Ruchi Kokcha Writes...

The Shards of my Self

%d bloggers like this: