मेरे ख़त..

#दिलसे

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चिट्ठियाँ…

#दिलसे

मेरे ख़त..

खबर है मुझे की पढ़ता मेरे ख़तों को वो,
बस जवाबों को लिफ़ाफ़े में छुपा रखा है।
एहसासों को खुलकर बयान करता नहीं,
दिल के जानेे किसी कोने में दबा रखा है।

तेरे ख़त..

तेरे लिखे ख़त दिया करते मेरे दिल पर दस्तक,
लिए बरसात की महक उनसे जाती मैं लिपट।
सुबह मेरी अपनी शामों से पिरो लेना कह कर,
कितनी दूर चल पड़ा तू बस शब्द दो लिखकर।

नाम को तेरे ओढ़कर सो जाया करती हर रात,
नींद के आग़ोश से जगाती मुझे तेरी हर बात।
तेरी परछाई की आहट से हो चली थी पहचान,
मिटा पाऊँगी क्या मेरी रूह पर से तेरे निशान।

कितने अनजान चेहरों को अपनाने की कोशिश,
तुझे भूल जाने की होती मेरी हर नाकाम साजिश।
तलाशती रही शिकायत करने को तेरी कोई बात,
दूर तुझसे जाने को थी काफी ऐसी बस एक याद।

कितने ही बरसों बाद आज तेरे शहर मेरा आना,
ना चाहते हुए जाने क्यूँ मिलने को हाँ कह जाना।
बातों में वही बेबाकी पर दूरियों का मिला एहसास,
बस ऐसी ही एक याद की बरसों से थी मुझे तलाश।

Inspiration – My writer friend Sayantani Dasgupta’s story published by Contrary Magazine. Read here (http://contrarymagazine.com/2015/geographies/)

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