रात..

#दिलसे

ख़्वाहिश….

गीतों में ढल के
और हल्के हल्के
ख़्वाबों में आना
कभी चलते चलते।

तुम्हे है बताना
मोहब्बत मेरी वो
वहीँ पर खड़ी है
ज़िद्द पर अड़ी है।

यूँ रूठी रहोगी
और कब तलक तुम
तारे था लाया
फ़लक से मैं चुन के।

तुम्हे है भूलाना
है खुद को मिटाना
तेरी ये ख़्वाहिश
अब मेरी जिंदगी है।

#दिलसे

इश्क़ तेरा…

तुम्हारी ज़ुल्फ़ और काँधे का तिल,
हाथ से फिसलता रहा मेरा ये दिल।

ख़ुश्बू तेरे जिस्म की जानता हूँ मैं,
खुद से दूर पर इसे पहचानता हूँ मैं।

यूँ ही सोता रहूँ मैं आग़ोश में तेरे,
ख़्वाबों में बस तू ही दिन-रात मेरे।

मुस्कुराहटें तेरी मेरी रूह का सुक़ून,
तेरे इश्क़ का अंदर उबलता रहा जूनून।

#दिलसे

शोखियाँ..

तुम्हारी निगाहों की वो चंद शोखियाँ,
मेरी शराब को भी नशे में डुबाती रही।
सर्द हवा के झोंकों के साथ ही सही,
तुम याद मुझे हर बरस आती रही।

#दिलसे

बाहों..

नफरतों की इन आँधियों में हवा इश्क़ की भी बहे,
भर ले कोई तो बाहों में अपनी हमें बिन कुछ कहे।

#दिलसे

प्रेम का धागा…

प्रेम का वो धागा
जिसे में अब तक
संजोये बैठा था
आज उसे खोलता हूँ।

मेरे हर हठ व् बंधन से
तुम अब मुक्त हो
टूट कर चाहा है तुम्हे
इसलिए इतना टटोलता हूँ।

वहीँ रहा मैं खड़ा
दूर तुम निकल गयीं
अपने हर शब्द को अब
तुम्हे कहने से पहले तोलता हूँ।

खुद को तुम व्यर्थ
यूँ ही खर्च ना करो
रोज ही उसके आगे
बहुत देर हाथ मैं जोड़ता हूँ।

मेरे प्रेम से तुम्हारा
मोह भंग यूँ हो जाएगा
सच है नहीं ये बिल्कुल
दिन-रात बस यही सोचता हूँ।

राह जो चुनी तुम ने
खुशियाँ मिलें वहाँ तुम्हें ढेरों
थामने को हाथ ना हो कोई कभी
यहीं मैं मिलूँगा आज फिर बोलता हूँ।

#दिलसे

रात..

ना पूछता कुछ ना ही कुछ बताता है
अपना हक़ भी अब नहीं जताता है,
मेरी तो बस आँखों में ही गुज़रती है
तू रात ऐ यार रोज़ कैसे सो पाता है।

#दिलसे

नया लिबास…

तुम से मिला इन दिनों तो
तुम, तुम सी नहीं लगी
सामने बैठी थी मेरे लेकिन
कितनी गम-सुम सी ही रहीं

दूर बहुत थे दोनों हम फिर भी
बस ये चाहा की खुश तुम रहो
हालात कैसे भी हो जीवन में
मुझ से बस कभी झूठ ना कहो

दिल खोल कर अपना रख दिया
बिन कुछ सोचे सब तुम्हे कहना
पहले सा सब था नहीं और
पड़ रहा था रोष तुम्हारा सहना

वक़्त के थपेड़ों ने शायद
तुम्हे मुझसे दूर कर दिया
कुछ नए लिबासों से तुम ने
पुराने रिश्तों को बदल लिया

#दिलसे

अधिकार नहीं….

हाँ मेरा तुम पर अधिकार नहीं
जीवन में अब वो रस-धार नहीं,
जिन आँखों ने स्वपन सजोये थे
उन नैनों में अब अश्रुधार सही।

इस हृदय ने चाहा था तुम्हे कभी
वो पल हर-पल जैसे हो यहाँ अभी,
मन ने कितने ही थे जो महल बनाये
पग-पग में सब बिखरे धूमिल यहीं।

इन हाथों में थामें हाथ तुम्हारा प्रिये
कितने ही मौसम दोनों हम संग जिए,
नक़्शे खींचे थे कुछ जीवन की राहों के
जुदा मंज़िलों पर हम फिर चल दिए।

तुम्हे समझा पाने के सब प्रयत्नों से
दूर निकल चली तुम मेरे जतनों से,
विजयी ध्वज कुछ फहराने थे पर
जीवन में अब हार मिली तो हार सही।

#दिलसे

ज़ख्म…

गुज़रा तेरे शहर से…तो कुछ ख़त्म सा था,
आँख में आंसू की जगह…एक ज़ख्म सा था।
तुझे भुला देने के सिवा…कोई सूरत भी नहीं,
कभी जिंदगी में मेरीे…तू मलहम सा था।

अफ़साने…

परवाह तुम मेरी करते नहीं,
खैर किस्से अब वो पुराने हुए।
ख़्वाबों से लगा करते थे जो,
अनजाने से वो अफ़साने हुए।

इबादत..

सिर्फ इश्क़ ही किया
बस यही गम था,
इबादत कर नहीं पाये
मोहब्बत में असर कम था।

रुस्वा..

कुछ मशहूरी मोहब्बत ने हमको दी,
कुछ रुस्वा तुम्हे कर बदनाम हम हुए।

शिकायतें…

मोहब्बत में इतनी शिकायतें अच्छी नहीं होती,
दिल दुखता है देख तेरी आँखों से गिरते मोती।

गली…

देखा तुझे जो आज गुज़रते गली से मेरी,
एक ज़माना मोहबत्तों का फिर याद आया।

तेरे ख़त..

तेरे लिखे ख़त दिया करते मेरे दिल पर दस्तक,
लिए बरसात की महक उनसे जाती मैं लिपट।
सुबह मेरी अपनी शामों से पिरो लेना कह कर,
कितनी दूर चल पड़ा तू बस शब्द दो लिखकर।

नाम को तेरे ओढ़कर सो जाया करती हर रात,
नींद के आग़ोश से जगाती मुझे तेरी हर बात।
तेरी परछाई की आहट से हो चली थी पहचान,
मिटा पाऊँगी क्या मेरी रूह पर से तेरे निशान।

कितने अनजान चेहरों को अपनाने की कोशिश,
तुझे भूल जाने की होती मेरी हर नाकाम साजिश।
तलाशती रही शिकायत करने को तेरी कोई बात,
दूर तुझसे जाने को थी काफी ऐसी बस एक याद।

कितने ही बरसों बाद आज तेरे शहर मेरा आना,
ना चाहते हुए जाने क्यूँ मिलने को हाँ कह जाना।
बातों में वही बेबाकी पर दूरियों का मिला एहसास,
बस ऐसी ही एक याद की बरसों से थी मुझे तलाश।

Inspiration – My writer friend Sayantani Dasgupta’s story published by Contrary Magazine. Read here (http://contrarymagazine.com/2015/geographies/)

छूट जाएंगे…

तेरी मेरी चाहतों के सिलसिले,
बीच राह में कुछ यूँ टूट जाएंगे।
जिंदगी के इस लम्बे सफ़र में,
हाथ अपने क्या आज छूट जाएंगे।
मुस्कुराहट में तेरी दर्द की आहट,
ये हंसी ही कभी देती थी राहत।
ज़ुबाँ को शब्द कुछ सूझते नहीं,
अपने इस अंजाम पर होता ना यकीं।
काँधे पर अपने मुझे रखने दे सर,
आखिरी शायद आज अपना ये सफ़र।

(Inspiration – A teary-eyed young couple in Delhi Metro on the verge of seperating)

Door apart..

One door apart,
two beating heart.
She’s inside coach,
out he pretends to look at watch.
Smile flashing on the faces,
everytime eyes meet.
Very obvious to all,
what they are trying to keep discreet.

Glances being exchanged,
she requests him to go.
He keeps waiting,
telling her only after you.
Connecting phone to charging point,
she said battery is dead.
Let’s chat in few minutes,
please come on Whatsapp.

At last doors close,
and Metro starts moving.
Both of them said “bye”,
but for long hands kept waving.
Smile on the face and typing on phone,
engrossed she is in her own world.
Life’s like a beautiful dream,
Oh that teenage love!

(Inspiration – A teenage couple in love at Kirti Nagar Metro station)

The Betrayal…

As I checked my Blackberry to see if there are any new mails, metro made a halt at Rajiv Chowk station and a huge crowd was inside the coach within a few seconds. A young woman in her mid twenties came and stood beside me at the right side, some male friend or a colleague was with her and they seemed to be discussing something.

“Listen, I am sorry! It was a mistake I committed under influence of alcohol” the guy was almost pleading to her in an over crowded metro.

People around were looking at them and trying to understand what’s happening.

“Under influence of alcohol?? Don’t give me that crap. I am not sure with how many sluts you would have slept so far under the influence of alcohol. I have been mad for you, gave six important years of my life. Is this what I deserve? No, I deserve better.”

“I swear, don’t know what and how does all this happened. I drank a lot that day in the party and lost my senses”

“Really!! You were not in your senses but conscious enough to get laid with that bitch. Do you expect me to believe this”?

As the guy tried holding her arm, she pulled herself back and almost shouted “Don’t…and stay away.”

By that time almost everyone around knew they are fighting and were staring at them.

“I love you, you know that very well and can not think of a life without you. Please forgive me.” young man said pleading.

“Oh, come on! Don’t start this again. You betrayed me, betrayed my love and the faith. I hate you, don’t want to see your face ever again. You better don’t try to call me.”

“No, it was not betrayal. I did not do anything intentionally. It just happened….”

“Aha, that’s not betrayal. How cool you are about it, you will understand only if I would do something like this. Like, like kissing this guy right here in front of everyone.” and she suddenly kissed me on my right cheek few times and held my arm tight.

Everyone in the coach was left stunned, including that guy. And by the time I realized what’s happening and shrugged her off, it was too late. And at the same time metro made a halt at Kirti Nagar station, I moved out and that woman followed me shouting to her ex-boyfriend by now “Don’t try to follow me or get down here, I will otherwise call cops.”  And he froze inside the metro coach while it moved out of the station.

I rushed to take stairs. She came running after me and said “Thanks a lot and I am really sorry to embarrass you like this. I was just looking for an opportunity to dump that bastard…….”

(Loosely Based on a true conversation I overheard recently in Delhi Metro between a couple in love; or may be not in love anymore)

Somethings unsaid…

Loved this…

Of cuppas, Musings and All That Matters

It still seems like a dream

violent inside but outside surreal…

Silly me still lives with hopes

that this isn’t the end of the road…

to take you in my arms

and dance till the dawn…

to love you under the moonlit sky

never to part till we are alive…

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You will never be mine…..

You will never be mine,
but I still love you.
Please listen to me,
you can’t go like this.
Do you understand,
how much you are being missed.

There was a time,
when you always waited for my calls.
Now even responding to a message,
for you is such a pain.
Please meet me once,
before you are gone.

With your dreams in my eyes,
how am I going to spend this life.
Can not ever stop thinking of you,
always felt we will make it through.
But with you losing all hope and moving on,
it feels life is finished and worth no more!

(Triggered by hearing one side conversation of a sweet little girl talking over phone to someone last evening in Delhi Metro, probably the one she loved to the core of her heart. She was almost of the verge of crying which disturbed me and can not still take off her my mind.)

Flame

aaj ki shairi

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

What do you do Deepti

Exploring madness***

आज सिरहाने

लिखो, शान से!

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

Ruchi Kokcha Writes...

The Shards of my Self

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