साए…

कब तक सायों के पीछे भागना,
यूँ रात-रात भर कब तक जागना।

#दिलसे

मेरी कलम…

मेरी कलम से..
जिसे तुमने धार दी..
जो सिर्फ तुम्हे लिखती रही..
शब्दों में ही सही तुम मुझे दिखती रही..

नम आँखों से..
तुम्हे रोज याद किया..
नींदें मेरी पलकों तक रही…
हर रात ने मुझे और बर्बाद किया..

#दिलसे

रात..

ना पूछता कुछ ना ही कुछ बताता है
अपना हक़ भी अब नहीं जताता है,
मेरी तो बस आँखों में ही गुज़रती है
तू रात ऐ यार रोज़ कैसे सो पाता है।

#दिलसे

आग़ोश…

रात भर याद तुझे करता रहा
आग़ोश को तेरे तड़पता रहा,
तड़प ये उम्र भर की हो शायद
दिल फिर भी तेरे लिए मचलता रहा।

#दिलसे

करवटें..

रात भर बिस्तर इंतज़ार में तेरे,
साथ मिरे करवटे बदलता रहा।

रात..

इस रात को और चमकदार बना दो,
बस एक बार आँखों से मुस्करा दो।

साये..

मुमकिन नहीं ताउम्र सायों के पीछे भागना,
दम तोड़ने लगा है अब रात-रात भर जागना।

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

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Exploring madness***

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aaiye, kuchh likhte hain..

abvishu

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Bhav-Abhivykti

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