सुनता हूँ..

सुनता हूँ, पर सुनता नहीं;
शोरगुल है चारों ओर,
क्यूं बस खुद को ही सुनता हूँ मैं।

अकेला नहीं, कई और मुझसे हैं यहाँ;
इतनी भीड़ चारों ओर,
लेकिन बस खुद को ढूंढता हूँ मैं।

क्या खोने को है, क्या पा सकता हूँ;
इतना कुछ चारों ओर,
फिर भी बस खुद की ही तलाश मे हूँ मैं।

(Adapted from Ashish Garg’s post – Hope)

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Candid Conversations by Rinku Bhardwaj

My honest take on personal excellence, a journey of becoming better version of myself through my experiences, interactions or readings!

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This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

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The Shards of my Self

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