शोखियाँ..

तुम्हारी निगाहों की वो चंद शोखियाँ,
मेरी शराब को भी नशे में डुबाती रही।
सर्द हवा के झोंकों के साथ ही सही,
तुम याद मुझे हर बरस आती रही।

#दिलसे

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मेरी कलम…

मेरी कलम से..
जिसे तुमने धार दी..
जो सिर्फ तुम्हे लिखती रही..
शब्दों में ही सही तुम मुझे दिखती रही..

नम आँखों से..
तुम्हे रोज याद किया..
नींदें मेरी पलकों तक रही…
हर रात ने मुझे और बर्बाद किया..

#दिलसे

अधिकार नहीं….

हाँ मेरा तुम पर अधिकार नहीं
जीवन में अब वो रस-धार नहीं,
जिन आँखों ने स्वपन सजोये थे
उन नैनों में अब अश्रुधार सही।

इस हृदय ने चाहा था तुम्हे कभी
वो पल हर-पल जैसे हो यहाँ अभी,
मन ने कितने ही थे जो महल बनाये
पग-पग में सब बिखरे धूमिल यहीं।

इन हाथों में थामें हाथ तुम्हारा प्रिये
कितने ही मौसम दोनों हम संग जिए,
नक़्शे खींचे थे कुछ जीवन की राहों के
जुदा मंज़िलों पर हम फिर चल दिए।

तुम्हे समझा पाने के सब प्रयत्नों से
दूर निकल चली तुम मेरे जतनों से,
विजयी ध्वज कुछ फहराने थे पर
जीवन में अब हार मिली तो हार सही।

#दिलसे

ज़ख्म…

गुज़रा तेरे शहर से…तो कुछ ख़त्म सा था,
आँख में आंसू की जगह…एक ज़ख्म सा था।
तुझे भुला देने के सिवा…कोई सूरत भी नहीं,
कभी जिंदगी में मेरीे…तू मलहम सा था।

रात..

इस रात को और चमकदार बना दो,
बस एक बार आँखों से मुस्करा दो।

चेहरा..

शहर से उसके जब भी गुजरा,
वही चेहरा आँखों में उभरा।

Soul’s balm..

Spark of your eyes,
ignites light in my heart.
Smile on your face,
leaves me wanting for an embrace.
Your eyelashes flutter,
it’s only you who matter.
Your tender tiny fingers,
fit so nicely in my palm.
Your head on shoulder,
is my soul’s balm.

(Inspiration – A young couple adjacent to whom I sat for about 45 minutes in Delhi metro and heard their conversation, observed them.)

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

What do you do Deepti

Exploring madness***

Aaj Sirhaane

aaiye, kuchh likhte hain..

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

angelalimaq

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Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

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