सीट…

सीट की ख़्वाहिश की यहाँ इतनी बिमारी है,
एक बुज़ुर्ग का बाहर निकलना तक भारी है।

#मेट्रो #दिलसे

खिलौना…

रात बहुत रोया होगा
मासूम कोई अपने खिलौने से बिछड़कर,
कोशिशें बहुत की होंगी
सो गया होगा वो माँ बाप से झगड़कर।

#दिलसे #मेट्रो

सफ़र..

​पूरा सफ़र बिता देते हैं फोन पर नज़रें गाड़े,
अब इश्क़ शायद सिर्फ व्हाट्सएप्प पर होता है।

#दिलसे #मेट्रो

दर्द…

​ये जो अँधेरों में भी काले चश्मे लगाते हैं,
आँखों का कोई दर्द तो दुनिया से छुपाते हैं।

#दिलसे #मेट्रो

सीट…

​बीमार भी हो तो सीट माँग नहीं पाता,
ग़रीब हार कर नीचे ही बैठ जाता है।

#दिलसे #मैट्रो #Metro

बुज़ुर्ग

​एक बुज़ुर्ग का भारी थैला उठाकर आज,
खुद को बहुत हल्का महसूस किया।

#दिलसे #मैट्रो

हिज़ाब…

हिज़ाब से झांकती वो ख़ूबसूरत आँखें,
जीना तो वो भी खुल के बहुत चाहती होगी।

#दिलसे #मेट्रो

Just like that

reach out and touch someone.....

Umesh Kaul

Traveler!!!! on the road

Yes I am Deepti

Exploring madness***

Aaj Sirhaane

aaiye, kuchh likhte hain..

abvishu

जो जीता हूँ उसे लिख देता हूँ

angelalimaq

food, travel and musings of a TV presenter.

Bhav-Abhivykti

This blog is nothing but my experiences of life and my thoughts towards the world.

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